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हेज़ लेइंग का पुनरुत्थान: किसान अपनाते प्राचीन तकनीक

हेज़ लेइंग का पुनरुत्थान: किसान अपनाते प्राचीन तकनीक

इंग्लैंड के खेतों में एक प्राचीन परंपरा फिर से जीवंत हो रही है। 18वीं‑19वीं सदी में शिखर पर पहुँची हेज़ लेइंग तकनीक अब आधुनिक किसान अपने भूमि में पुनः स्थापित कर रहे हैं, जिससे जैव विविधता, कार्बन संग्रह और बाढ़‑रोकथाम में मदद मिल रही है।

सरकारी समर्थन की नई लहर

इस साल सरकार ने ग्रामीण पर्यावरणीय सुधारों के लिए कुल £225 मिलियन की पूँजी ग्रांट उपलब्ध कराई। इन फंडों में से चार सबसे लोकप्रिय श्रेणियों में हेज़ लेइंग को स्थान मिला, और आवेदन की संख्या में उल्लेखनीय उछाल देखा गया। किसान अब इस निधि का उपयोग करके पुराने बाड़ों को पुनर्स्थापित, आकार बदलने और नई पंक्तियों की स्थापना कर रहे हैं।

हजारों हेज़, कई लाभ

हेज़ लेइंग केवल सौंदर्यात्मक सुधार नहीं है; यह एक बहु‑कार्यात्मक समाधान है। बाड़ें प्राकृतिक आवास प्रदान करती हैं, जिससे पक्षी, कीट और छोटे स्तनधारी जीवों की आबादी बढ़ती है। साथ ही, गहरी जड़ें मिट्टी में कार्बन को स्थायी रूप से बंधित करती हैं, जिससे राष्ट्रीय कार्बन‑डायऑक्साइड लक्ष्य में योगदान मिलता है। बाढ़‑रोकथाम के संदर्भ में, हेज़ जल प्रवाह को धीमा कर देते हैं, जिससे अत्यधिक वर्षा के दौरान जल‑संकट का जोखिम घटता है।

प्राचीन तकनीक, आधुनिक उपकरण

हेज़ लेइंग में बाड़ों को "लेइंग" (laying) कहा जाता है, जहाँ लकड़ी के डंडे (स्टिलेज़) को जमीन पर रखकर हेज़ को समतल किया जाता है, फिर उसे फिर से बंधा जाता है। इस प्रक्रिया से बाड़ें पुरानी उम्र में भी स्वस्थ और घनी बनी रहती हैं। आज के किसान ट्रैक्टर‑सहायता वाले उपकरणों और डिजिटल मैपिंग का उपयोग करके बाड़ों के स्थान और स्वास्थ्य को मॉनिटर कर रहे हैं, जिससे काम की दक्षता बढ़ी है।

भविष्य की दिशा

सरकारी फंडिंग के साथ, कई कृषि‑पर्यावरण योजनाएँ हेज़ लेइंग को मुख्य घटक के रूप में शामिल कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रवृत्ति को जारी रखा गया, तो अगले पाँच वर्षों में इंग्लैंड के ग्रामीण परिदृश्य में हेज़ कवरेज में 30 % तक की वृद्धि हो सकती है। यह न केवल जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन बढ़ाएगा, बल्कि ग्रामीण समुदायों को आर्थिक रूप से भी सुदृढ़ करेगा।

समग्र रूप से, हेज़ लेइंग का पुनरुत्थान यह दर्शाता है कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक नीति‑निर्धारण मिलकर कैसे स्थायी कृषि‑पर्यावरण समाधान तैयार कर सकते हैं।

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